दुबई की प्राथमिक अदालत (कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस) ने एक व्यक्ति और उसके बेटे को संयुक्त रूप से उस व्यक्ति की पत्नी को 16.1 मिलियन दिरहम चुकाने का आदेश दिया है। यह आदेश वैवाहिक विवाद के दौरान उसके गहने, महंगी घड़ियाँ और नकदी ले लेने के कारण दिया गया।

यह राशि 15.1 मिलियन दिरहम, जो 100 से अधिक सोने और हीरे के गहनों, घड़ियों और नकदी का मूल्य है, तथा भौतिक और नैतिक क्षति के लिए 1 मिलियन दिरहम के मुआवज़े से मिलकर बनी है।

दोनों पुरुषों को इससे पहले एक आपराधिक अदालत चोरी का दोषी ठहरा चुकी थी, जिसमें उन्हें एक वर्ष की जेल की सज़ा सुनाई गई और संयुक्त रूप से 15.1 मिलियन दिरहम का जुर्माना लगाया गया। अपील न्यायालय ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

इसके बाद पत्नी ने 50 मिलियन दिरहम की माँग करते हुए दीवानी मुकदमा दायर किया। इसमें लगभग 11 मिलियन दिरहम का वह मुनाफ़ा शामिल था, जिसके बारे में उसका कहना था कि सोने की कीमतों में कम से कम 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी के कारण वह उसे गँवा बैठी, और भावनात्मक तथा नैतिक क्षति के लिए लगभग 23.9 मिलियन दिरहम।

अदालत ने सोने से हुए मुनाफ़े के नुकसान का दावा खारिज कर दिया और कहा कि मुआवज़ा काल्पनिक लाभ पर नहीं, बल्कि वास्तविक क्षति पर आधारित होना चाहिए; बाकी दावे भी खारिज कर दिए गए।

(स्रोत: खलीज टाइम्स)