दुबई, 27 सितंबर 2026 (WAM) – उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्रालय ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भर में विश्वविद्यालय नामांकन में निरंतर वृद्धि की जानकारी दी है। पिछले शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश पाने वाले छात्रों की संख्या उससे पहले के वर्ष की तुलना में 15% बढ़ी, जिससे 2025-2026 शैक्षणिक वर्ष में कुल नामांकन 2,18,000 से अधिक हो गया। मंत्रालय ने कहा कि यह वृद्धि लचीली प्रवेश नीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाती है, जो राष्ट्रीय आर्थिक प्राथमिकताओं और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप छात्रों को श्रम बाज़ार में प्रवेश के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल विकसित करने के व्यापक अवसर प्रदान करती हैं।
अमीरात समाचार एजेंसी (WAM) को दिए एक साक्षात्कार में उच्च शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्रालय के अवर सचिव डॉ. अहमद सुल्तान अल शोएबी ने बताया कि उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुँच का विस्तार मंत्रालय और संस्थानों के बीच रीयल-टाइम डेटा कनेक्टिविटी की एक एकीकृत प्रणाली से समर्थित है। इससे मंत्रालय प्रवेश और नामांकन संकेतकों की निरंतर निगरानी कर पाता है, साथ ही उच्च शिक्षा क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले कानूनों और स्वीकृत राष्ट्रीय ढाँचों के अनुसार प्रवेश प्रक्रियाओं के प्रबंधन में विश्वविद्यालयों की दक्षता भी बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि बीती अवधि में दर्ज संकेतक उच्च शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने वाली नीतियों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाते हैं। पिछले शैक्षणिक वर्ष में यूएई के उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश पाने वाले छात्रों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में 15% की वृद्धि दर्ज की गई, और प्रवेश पाकर नामांकित छात्रों की कुल संख्या 64,000 से अधिक रही, जिनमें लगभग 32,000 अमीराती छात्र शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “2025-2026 शैक्षणिक वर्ष में उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकित छात्रों की संख्या 2,18,000 से अधिक हो गई, जिनमें लगभग 1,24,000 अमीराती छात्र हैं। प्रवेश नीतियों के विकास का प्रभाव छात्रों के लिए उपलब्ध शैक्षिक मार्गों की विविधता तक भी पहुँचा है। डिप्लोमा और उच्च डिप्लोमा कार्यक्रमों में नामांकित छात्रों की संख्या 2021-2022 शैक्षणिक वर्ष के 3,995 से बढ़कर 2025-2026 में 10,926 हो गई, जो 173% की वृद्धि है। यह विस्तार छात्रों को अधिक विकल्प देता है और उन्हें ऐसी योग्यताएँ और कौशल हासिल करने में मदद करता है जो श्रम बाज़ार के लिए उनकी तत्परता बढ़ाते हैं।”
उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश नीतियों और मानदंडों का विकास एक स्पष्ट और एकीकृत दृष्टि का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विश्वविद्यालयी सीटों तक छात्रों की पहुँच बढ़ाना तथा उच्च शिक्षा प्रणाली के लचीलेपन और छात्रों की ज़रूरतों व विविध शैक्षणिक मार्गों को समायोजित करने की उसकी क्षमता को सुदृढ़ करना है, साथ ही शैक्षिक परिणामों की गुणवत्ता बनाए रखते हुए उन्हें श्रम बाज़ार की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा संस्थानों को अपने कार्यक्रमों और विशेषज्ञताओं की प्रकृति के अनुसार प्रवेश मानदंड तय करने में अधिक लचीलापन देना इस क्षेत्र के शासन मॉडल के विकास का हिस्सा है। उनके अनुसार यह दृष्टिकोण अपने छात्रों के शैक्षणिक स्तर और परिणामों की गुणवत्ता के प्रति संस्थानों की ज़िम्मेदारी को मज़बूत करता है और उन्हें अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों की प्रकृति और स्तर के अनुरूप प्रवेश नीतियाँ बनाने में सक्षम बनाता है। इसे सभी विश्वविद्यालयों पर लागू एक एकीकृत और स्पष्ट रूप से परिभाषित ढाँचे के भीतर लागू किया जाता है, साथ में एक परिणाम-आधारित मूल्यांकन ढाँचा भी है जो इस लचीलेपन का समर्थन करता है और गुणवत्ता की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
इस संदर्भ में डॉ. अल शोएबी ने ज़ोर देकर कहा कि प्रवेश मानदंड तय करने में संस्थानों को दिए गए लचीलेपन का अर्थ किसी भी रूप में गुणवत्ता आवश्यकताओं से समझौता नहीं है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ऐसी किसी भी प्रथा या प्रवेश नीति को बर्दाश्त नहीं करेगा जो शैक्षिक प्रक्रिया की गुणवत्ता को कमज़ोर करे या उसके परिणामों के स्तर को प्रभावित करे।
उन्होंने कहा कि स्वीकृत प्रवेश नीतियाँ अग्रणी अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं में से एक हैं और छात्रों को उनकी क्षमताओं के अनुरूप शैक्षिक मार्गों में प्रवेश दिलाने का साधन हैं, वह भी शैक्षणिक मानकों या स्नातकों की दक्षता और श्रम बाज़ार की ज़रूरतें पूरी करने की उनकी क्षमता से समझौता किए बिना।
डॉ. अल शोएबी ने बताया कि शासन, निगरानी और जवाबदेही की एकीकृत प्रणाली के भीतर उच्च शिक्षा संस्थान यह सुनिश्चित करने के लिए ज़िम्मेदार हैं कि उनके प्रवेश मानदंड उनके शैक्षणिक कार्यक्रमों की प्रकृति के अनुरूप हों। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य उच्च शिक्षा तक पहुँच के विस्तार, गुणवत्ता मानकों के संरक्षण, स्नातकों की दक्षता सुनिश्चित करने और श्रम बाज़ार के लिए उनकी तत्परता बढ़ाने के बीच संतुलन स्थापित करना है।
उन्होंने आगे कहा कि हाल के वर्षों में उच्च शिक्षा प्रणाली ने उल्लेखनीय गुणात्मक प्रगति की है, जिसमें श्रम बाज़ार और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की भविष्य की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए शासन और शैक्षिक परिणामों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान दिया गया है। उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रदर्शन की भी निरंतर निगरानी और मूल्यांकन होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रवेश मानदंडों में अधिक लचीलापन गुणवत्ता आवश्यकताओं में ढील नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के शासन मॉडल के विकास का हिस्सा है और मुख्य रूप से इनपुट के विनियमन पर निर्भरता से हटकर एक अधिक व्यापक प्रणाली की ओर बदलाव है, जो संस्थागत स्वायत्तता को परिणामों की गुणवत्ता के प्रति जवाबदेही से जोड़ती है। इसे एक परिणाम-आधारित मूल्यांकन ढाँचे का समर्थन प्राप्त है, जो प्रवेश के लचीलेपन के साथ-साथ काम करता है ताकि गुणवत्ता मानकों से समझौता किए बिना क्षेत्र की आवश्यकताओं के प्रति गतिशील प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।
मंत्रालय ने पुष्टि की कि यूएई में उच्च शिक्षा संस्थान कार्यक्रमों के प्रवेश मानदंडों पर 2024 का मंत्रिस्तरीय प्रस्ताव संख्या 19 उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए अपने कार्यक्रमों हेतु स्पष्ट प्रवेश मानदंड निर्धारित करना अनिवार्य करता है। यह प्रवेश पाने वाले छात्रों के शैक्षणिक कौशल में संभावित कमियों को दूर करने के लिए प्रारंभिक या उपचारात्मक पाठ्यक्रमों या कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने की शर्त पर सशर्त प्रवेश की भी अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त, छात्रों के लिए उनकी क्षमताओं और शैक्षिक मार्गों के अनुसार डिप्लोमा, उच्च डिप्लोमा और आंशिक योग्यता के विकल्प उपलब्ध हैं।
माध्यमिक विद्यालय के न्यूनतम अंकों और विशेष विषयों के अंकों के संबंध में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में एकल, मानकीकृत न्यूनतम आवश्यकता का न होना शैक्षणिक नियंत्रणों की अनुपस्थिति का संकेत नहीं है। बल्कि यह एक ऐसे दृष्टिकोण को दर्शाता है जो संस्थानों को कार्यक्रम व विशेषज्ञता की प्रकृति और आवश्यक तैयारी के स्तर के अनुसार प्रवेश आवश्यकताएँ तय करने का लचीलापन देता है, जबकि इन नीतियों के परिणाम निरंतर निगरानी, मूल्यांकन और पर्यवेक्षण के अधीन रहते हैं।
प्रत्येक प्रवेश मानदंड को निर्धारित या संशोधित करते समय मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति की अनिवार्यता न होने के विषय में मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान मॉडल उच्च शिक्षा संस्थानों की अपने शैक्षणिक निर्णयों के प्रति ज़िम्मेदारी को मज़बूत करने और उनके प्रदर्शन को निरंतर निगरानी व मूल्यांकन के अधीन रखने पर आधारित है। अतः हर संशोधन के लिए पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता न होने का अर्थ यह नहीं है कि मंत्रालय की पर्यवेक्षी भूमिका समाप्त हो गई है। मंत्रालय शैक्षणिक प्रत्यायन नवीनीकरण प्रक्रियाओं, आवधिक निगरानी और निरीक्षण दौरों तथा प्रवेश प्रथाओं की गुणवत्ता के निरंतर मूल्यांकन के माध्यम से प्रवेश मानदंडों के अनुपालन की जाँच करता है।
यह मुख्य रूप से प्रक्रियात्मक पूर्व स्वीकृति पर आधारित निगरानी से निरंतर जवाबदेही के एक व्यापक मॉडल की ओर बदलाव है। इससे छात्रों, कार्यक्रमों, स्नातकों और श्रम बाज़ार पर प्रवेश नीतियों के प्रभाव का आकलन संभव होता है, और शैक्षिक प्रक्रिया की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली प्रथाओं की पहचान होने पर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
मंत्रालय ने पर्याप्त शैक्षणिक नियंत्रणों के बिना ‘खुले प्रवेश’ और यूएई में लागू स्पष्ट व सुदृढ़ मानकों से संचालित विनियमित लचीलेपन के मॉडल के बीच अंतर करने के महत्व पर भी बल दिया। यूएई मॉडल में बिना नियंत्रण के प्रवेश खोलना शामिल नहीं है; बल्कि यह प्रवेश मानदंड तय करने में संस्थागत लचीलेपन को आवश्यकता पड़ने पर प्रारंभिक और उपचारात्मक कार्यक्रमों, शैक्षणिक प्रत्यायन, निरीक्षण और पर्यवेक्षण तथा शैक्षिक परिणामों की निरंतर निगरानी के साथ जोड़ता है।
इसलिए लचीलेपन के प्रभाव का आकलन केवल प्रवेश के समय के मानदंडों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें छात्रों के बने रहने और पढ़ाई पूरी करने, रोज़गार, शिक्षा की गुणवत्ता और स्नातकों के कौशल का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की ज़रूरतों से तालमेल जैसे संकेतकों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मंत्रालय परिणामों की गुणवत्ता और उनके प्रभाव के मापन पर केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से उच्च शिक्षा प्रणाली का विकास जारी रखे हुए है। इसमें सीखने के परिणाम और रोज़गार, आर्थिक व औद्योगिक क्षेत्रों के साथ साझेदारी और भविष्य की तत्परता शामिल हैं, साथ ही श्रम बाज़ार की भविष्य की ज़रूरतों का पूर्वानुमान लगाने और राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले आर्थिक क्षेत्रों में आवश्यक कौशल व विशेषज्ञताओं की पहचान करने के उपकरणों का विकास भी शामिल है।
मंत्रालय ने ज़ोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा तक पहुँच का विस्तार और विश्वविद्यालय स्नातकों के स्तर को बनाए रखना परस्पर पूरक लक्ष्य हैं। वह प्रवेश नीतियों और उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रदर्शन संकेतकों की निरंतर निगरानी और मूल्यांकन करता रहता है, ताकि छात्रों के लिए व्यापक शैक्षिक अवसरों और स्नातकों की गुणवत्ता व दक्षता सुनिश्चित करने तथा श्रम बाज़ार में प्रतिस्पर्धा के लिए उनकी तत्परता और क्षमता बढ़ाने के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
(स्रोत: WAM.ae)
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