अबू धाबी, 27 सितंबर 2026 (WAM) -- न्याय मंत्री और संघीय न्यायिक परिषद के अध्यक्ष अब्दुल्ला सुल्तान बिन अवाद अल नुऐमी ने दोहराया कि यूएई ने अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग की एक एकीकृत प्रणाली स्थापित की है, जो सुदृढ़ कानूनी ढांचे, प्रत्यक्ष साझेदारी, त्वरित प्रतिक्रिया और डिजिटल परिवर्तन को जोड़ती है, जिससे सीमाओं का उपयोग न्याय से बचने या अपराध से अर्जित आय को बचाने के लिए नहीं किया जा सकता।

अल नुऐमी ने यह टिप्पणी “अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग को सुदृढ़ करना: यूएई का अनुभव और वैश्विक साझेदारियाँ” शीर्षक वाली विषयगत बैठक में की, जो अपराध रोकथाम और आपराधिक न्याय पर 15वीं संयुक्त राष्ट्र कांग्रेस - अबू धाबी 2026 के उच्च-स्तरीय खंड के अंतर्गत आयोजित की गई। व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के साथ यह कांग्रेस 1 अक्टूबर तक अबू धाबी में जारी रहेगी।

अल नुऐमी ने कहा, “आज अपराध की कोई सीमा नहीं है। अपराधी, परिसंपत्तियाँ, धन और साक्ष्य कई क्षेत्राधिकारों में आ-जा सकते हैं, जिसका अर्थ है कि कोई भी देश अकेले अंतरराष्ट्रीय अपराध से नहीं लड़ सकता। यूएई का संदेश स्पष्ट है: सीमाएँ कभी भी अपराधियों या आपराधिक परिसंपत्तियों के लिए ढाल नहीं बननी चाहिए।”

उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रभावी न्यायिक सहयोग के माध्यम से विधि के शासन को बनाए रखने वाली सुदृढ़ न्यायिक प्रक्रियाओं द्वारा अपराध से अर्जित आय का पता लगाया जा सके, उसे फ्रीज़, ज़ब्त और वसूल किया जा सके। हम अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग को देशों के बीच एक साझेदारी के रूप में देखते हैं, जो विश्वास, प्रत्यक्ष संवाद, त्वरित कार्रवाई और व्यावहारिक समाधानों पर आधारित है।”

अल नुऐमी ने बताया कि यूएई का दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय सहयोग को अधिक तेज़ और प्रभावी बनाने, केंद्रीय प्राधिकरणों के साथ प्रत्यक्ष संवाद को मज़बूत करने, परिसंपत्ति वसूली में सुधार करने, मज़बूत और दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय न्यायिक साझेदारियाँ बनाने तथा यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि सभी प्रक्रियाएँ विधि के शासन के अनुरूप रहें।

उन्होंने यूएई के अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग का समर्थन करने वाले कानूनी ढांचे की रूपरेखा प्रस्तुत की, जो तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है: बहुपक्षीय समझौते, द्विपक्षीय समझौते और घरेलू कानून। उन्होंने कहा कि यूएई 16 सार्वभौमिक और क्षेत्रीय बहुपक्षीय समझौतों का पक्षकार है और 53 देशों के साथ उसके 140 से अधिक द्विपक्षीय समझौते लागू हैं। ये समझौते प्रत्यर्पण, पारस्परिक कानूनी सहायता, परिसंपत्तियों को फ्रीज़ और ज़ब्त करने, साक्ष्य एकत्र करने और सज़ायाफ्ता व्यक्तियों के स्थानांतरण को कवर करते हैं।

यूएई के लगभग 30% द्विपक्षीय समझौतों पर पिछले पाँच वर्षों के दौरान हस्ताक्षर किए गए। चार अतिरिक्त समझौते इस वर्ष के अंत से पहले हस्ताक्षर के लिए तैयार हैं, दो पर वर्तमान में बातचीत चल रही है और आठ अन्य मसौदा रूप में हैं।

अल नुऐमी ने कहा कि संघीय कानून अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मज़बूत घरेलू कानूनी आधार प्रदान करते हैं, जिनमें धन शोधन निवारण तथा आतंकवाद और प्रसार के वित्तपोषण का मुकाबला करने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने कहा, “जहाँ कोई संधि मौजूद नहीं है, वहाँ यूएई पारस्परिकता पर निर्भर करता है, जो राष्ट्रीय कानून में शामिल प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून का एक प्रमुख सिद्धांत है।”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि प्रभावी न्यायिक सहयोग की शुरुआत संघीय और स्थानीय अभियोजन विभागों और अदालतों, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के बीच एकीकृत घरेलू समन्वय से होती है, साथ ही केंद्रीय प्राधिकरणों, न्यायिक निकायों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग भी आवश्यक है। 2026 में यूएई ने दुनिया भर के समकक्ष केंद्रीय प्राधिकरणों के साथ 35 से अधिक द्विपक्षीय बैठकें कीं।

अल नुऐमी ने बताया कि 2021 से 2025 के बीच प्राप्त अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग अनुरोधों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। प्राप्त पारस्परिक कानूनी सहायता अनुरोधों में 244% की वृद्धि हुई, जबकि प्राप्त प्रत्यर्पण अनुरोधों में 235% की वृद्धि हुई, जो यूएई की कानूनी और न्यायिक प्रणाली में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के उच्च स्तर के विश्वास को दर्शाता है।

2025 में यूएई को कुल 576 प्रत्यर्पण अनुरोध प्राप्त हुए। अदालतों ने 178 मामलों में निर्णय जारी किए, जबकि शेष अनुरोध या तो समीक्षाधीन थे या अतिरिक्त जानकारी की प्रतीक्षा में थे। यूएई को 547 पारस्परिक कानूनी सहायता अनुरोध भी प्राप्त हुए, जिनके संबंध में सक्षम प्राधिकरणों ने लापता जानकारी प्राप्त करने और उन्हें शीघ्र पूरा करने के लिए 710 अनुस्मारक जारी किए।

अल नुऐमी ने आयरलैंड के साथ सहयोग का एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया। यूएई के अधिकारियों ने प्रत्यर्पण अनुरोध प्राप्त होने के 48 घंटों के भीतर किनाहन संगठित अपराध समूह के एक वरिष्ठ नेता डैनियल किनाहन को गिरफ़्तार किया। मामले की पूर्ण न्यायिक समीक्षा हुई, जिसका समापन दुबई कोर्ट ऑफ़ कैसेशन के अंतिम निर्णय के साथ हुआ, जिसके बाद 9 अगस्त 2026 को प्रत्यर्पण किया गया।

उन्होंने फ्रांस के साथ चार व्यक्तियों से जुड़े एक न्यायिक सहयोग मामले का भी उल्लेख किया। यूएई और फ्रांसीसी अधिकारियों के बीच प्रत्यक्ष समन्वय से परिसंपत्तियों की पहचान और उनका पता लगाया गया, और दुबई लोक अभियोजन द्वारा अनुरोध के निष्पादन के बाद नवंबर 2025 में यूएई में 82 संपत्तियाँ ज़ब्त की गईं।

अल नुऐमी ने बताया कि स्वैच्छिक प्रत्यर्पण के लिए औसत प्रतिक्रिया समय घटकर पाँच दिन रह गया है, जबकि एक पूर्ण पारस्परिक कानूनी सहायता अनुरोध औसतन 35 दिनों में निष्पादित किया जाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग दिशानिर्देशों में इसके लिए 60 से 180 दिनों की समय-सीमा निर्धारित है।

उन्होंने पुष्टि की कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग सहायता प्रणाली (ICAS) पूरी तरह डिजिटल है और इसने कुछ प्रक्रियाओं को पूरा करने में लगने वाले समय को सात दिनों से घटाकर पाँच मिनट कर दिया है। इस प्रणाली ने कर्मचारियों के प्रयास में लगभग 80% की कमी की है और चयनित प्रक्रियाओं में 90% तक सुधार किया है।

अल नुऐमी ने अंत में कहा कि यूएई अपने संधि नेटवर्क का विस्तार, कानूनी और न्यायिक साझेदारियों को गहरा करने, सूचना और साक्ष्य के आदान-प्रदान में तेज़ी लाने तथा डिजिटल उपकरणों के विकास का कार्य जारी रखेगा। ये प्रयास संगठित और अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने तथा न्याय और विधि के शासन को आगे बढ़ाने में एक विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में यूएई की स्थिति को सुदृढ़ करते हैं।

(स्रोत: WAM.ae)