अबू धाबी, 1 सितंबर 2026 (WAM) -- संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना प्रमुखों की कार्यशाला अबू धाबी में शुरू हुई, जिसकी मेज़बानी संयुक्त अरब अमीरात का गृह मंत्रालय 31 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक कर रहा है और जिसमें 23 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कार्यशाला में दुनिया भर के संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के पुलिस प्रमुख और सैन्य घटक, साथ ही संयुक्त राष्ट्र तथा गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि एक मंच पर आए हैं। संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राष्ट्र के बीच जारी सहयोग के तहत आयोजित यह कार्यशाला, शांति स्थापना अभियानों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने तथा सुरक्षा और मानवीय चुनौतियों से निपटने की उनकी क्षमता को मज़बूत करने वाली अंतरराष्ट्रीय पहलों के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। चर्चाओं में संयुक्त राष्ट्र पुलिस के समक्ष चुनौतियाँ, संयुक्त राष्ट्र पुलिस प्रमुख शिखर सम्मेलन के परिणाम, शांति स्थापना प्रदर्शन, ज्ञान प्रबंधन एवं मार्गदर्शन, स्थायी पुलिस क्षमताएँ, परिचालन संबंधी चुनौतियाँ तथा संवेदनशील और लैंगिक दृष्टि से समावेशी पुलिस व्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं। कार्यशाला विभिन्न संयुक्त राष्ट्र मिशनों के पुलिस घटक प्रमुखों को अनुभव साझा करने का अवसर भी देती है और इसमें पुलिस इकाइयों तथा व्यक्तिगत अधिकारियों के प्रदर्शन मूल्यांकन मानकों, आपात योजना, रिपोर्टिंग, बजट निर्माण और गोला-बारूद प्रबंधन पर विचार किया जा रहा है। आगे की चर्चाएँ शांति स्थापना अभियानों के पुलिस और सैन्य घटकों के बीच समन्वय मज़बूत करने पर केंद्रित हैं। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त अरब अमीरात के स्थायी मिशन के पुलिस अताशे कर्नल सईद अल धाहेरी ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्यशाला अमीरात और संयुक्त राष्ट्र के बीच सहयोग को मज़बूत करने तथा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को सहारा देने में अहम भूमिका निभाती है। अल धाहेरी ने कहा कि इस कार्यशाला की मेज़बानी संयुक्त राष्ट्र के शांति प्रयासों के प्रति अमीरात की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है और यह विशेषज्ञता तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान, प्रदर्शन मूल्यांकन ढाँचों के विकास और शांति अभियानों की दक्षता एवं प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रमुखों के साथ सैन्य नेतृत्व की भागीदारी दोनों घटकों के बीच निकट समन्वय की दिशा में अहम कदम है और यह इस साझा विश्वास को दर्शाती है कि टिकाऊ शांति के लिए शांति अभियानों से जुड़े सभी पक्षों का वास्तविक सहयोग आवश्यक है। संयुक्त राष्ट्र के पुलिस सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल फैसल ने कहा कि अमीरात द्वारा इस कार्यशाला की मेज़बानी संयुक्त राष्ट्र प्रणाली को समर्थन देने और शांति अभियानों में अपना योगदान बढ़ाने की उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में पुलिसिंग और सुरक्षा तरीकों के निरंतर विकास तथा प्रौद्योगिकी और आँकड़ों पर आधारित अधिक लचीले और नवाचारी मॉडलों की ओर बढ़ने की आवश्यकता है, जो दक्षता, तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया पर टिके हों। उन्होंने कहा कि जटिल परिस्थितियों में काम करने में सक्षम प्रशिक्षित पुलिस क्षमताओं का निर्माण और पुलिस तथा सेना के बीच निकट समन्वय, शांति अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाने तथा ज़मीनी स्तर पर स्थायी प्रभाव हासिल करने के लिए बुनियादी है। लेफ्टिनेंट जनरल फैसल ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन प्रभावी नेतृत्व, विभिन्न घटकों के बीच समन्वय और तेज़ी से बदलते संघर्ष परिवेश के अनुरूप ढलने की क्षमता पर निर्भर करता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि प्राथमिकताओं में तालमेल और पुलिस-सैन्य समन्वय को मज़बूत करना संयुक्त राष्ट्र मिशनों के लिए अपने अधिदेश पूरे करने, नागरिकों की रक्षा करने तथा मेज़बान देशों में स्थिरता और विधि के शासन को सहारा देने के लिहाज़ से निर्णायक है। संयुक्त राष्ट्र की कार्यवाहक सैन्य सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल शेरिल पीयर्स ने कहा कि शांति स्थापना अभियान लगातार जटिल होते भू-राजनीतिक और परिचालन माहौल में चल रहे हैं, जिसमें संघर्ष अधिक उलझे हुए हैं, सीमापार खतरे बढ़ रहे हैं, ड्रोन का प्रसार हो रहा है और सूचना एवं प्रौद्योगिकी संबंधी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि शांति स्थापना का भविष्य यह माँग करता है कि मिशन अधिक अनुकूलनशील, गतिशील और प्रतिक्रियाशील बनें तथा स्थिति की समझ बेहतर करने, निर्णय प्रक्रिया को सहारा देने और परिचालन प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करें, जबकि शांति अभियानों का मूलतः राजनीतिक स्वरूप बरकरार रहे। पीयर्स ने कहा कि शांति मिशनों के विकास के लिए उनके सबसे महत्वपूर्ण कार्यों की पहचान, उन्हें पूरा करने के लिए ज़रूरी क्षमताओं की उपलब्धता और विभिन्न संस्थाओं एवं टीमों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने ज़ोर दिया कि शांति सैनिकों की सुरक्षा मिशनों की योजना और क्रियान्वयन में सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए, जिसे उपयुक्त प्रशिक्षण और क्षमताओं, बेहतर स्थितिजन्य जागरूकता, आवश्यकता पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सहायता तथा पूर्व घटनाओं से सीखे गए सबक के ज़रिए सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
(स्रोत: WAM.ae)
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