इस्तांबुल, 6 सितंबर 2026 (WAM) -- ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री अलपार्सलान बायरकतार ने कहा कि जिस समय दुनिया अपने बिजली बुनियादी ढांचे पर “पुनर्विचार करने, उसे नए सिरे से डिजाइन करने और मजबूत बनाने” का प्रयास कर रही है, तुर्किये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को किफायती और दीर्घकालिक जलवायु वित्त तक पहुंच की आवश्यकता है।
इस्तांबुल जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए बायरकतार ने कहा, “अकेले सार्वजनिक वित्त पर्याप्त नहीं होगा।” अनादोलु एजेंसी के अनुसार उन्होंने कहा, “हमें निजी पूंजी, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, विकास बैंकों और दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों को जुटाने की आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा, “अकेले तुर्किये में, केवल वर्ष 2035 तक ही, हमें अपने बिजली बुनियादी ढांचे में कम से कम 80 अरब डॉलर का निवेश करना होगा।” उन्होंने आगे कहा कि वित्तपोषण तंत्रों को जोखिम कम करना चाहिए, पूंजी की लागत घटानी चाहिए तथा स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-सहनशील बुनियादी ढांचे में निवेश को व्यावसायिक रूप से आकर्षक बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “तुर्किये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए, और विशेष रूप से इन्हीं अर्थव्यवस्थाओं के लिए, किफायती और दीर्घकालिक जलवायु वित्त तक पहुंच अत्यंत आवश्यक है।” तुर्की मंत्री ने आगे कहा, “यदि ठीक उन्हीं देशों में वित्तपोषण महंगा या अनुपलब्ध बना रहता है जहां ऊर्जा मांग और निवेश की आवश्यकताएं सबसे तेजी से बढ़ रही हैं, तो ऊर्जा परिवर्तन वैश्विक स्तर पर सफल नहीं हो सकता।”
बायरकतार ने कहा कि वैश्विक तापमान वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के कारण भी बिजली बुनियादी ढांचे पर पुनर्विचार करना, उसे नए सिरे से डिजाइन करना और मजबूत बनाना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा, “तुर्किये सहित पूरी दुनिया में हम पहले से ही अधिक बार और अधिक गंभीर चरम मौसमी घटनाएं देख रहे हैं।” उन्होंने कहा, “लू, बाढ़, तूफान, सूखा और जंगल की आग — ये सभी बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण को प्रभावित कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि इसलिए जलवायु वित्त को केवल उत्सर्जन में कटौती का ही नहीं, बल्कि सहनशीलता और अनुकूलन का भी समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा, “आज हम जो बुनियादी ढांचा बना रहे हैं, उसे आने वाले दशकों की जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप डिजाइन किया जाना चाहिए, न कि केवल अतीत की परिस्थितियों के अनुसार। और इसके लिए विशाल वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है।”
उन्होंने ऊर्जा परिवर्तन को “पैमाने की दृष्टि से अभूतपूर्व” बताया, जिसके लिए अधिक नवीकरणीय ऊर्जा, बेहतर ऊर्जा दक्षता, परमाणु ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, विद्युतीकरण तथा पारेषण और वितरण नेटवर्क में पर्याप्त निवेश की आवश्यकता है।
(स्रोत: WAM.ae)
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