बैंक ऑफ सिंगापुर के सीईओ जेसन मू के अनुसार, दुबई और सिंगापुर दुनिया के दो सबसे प्रभावशाली वेल्थ मैनेजमेंट केंद्रों के रूप में अपनी स्थिति मज़बूत कर रहे हैं, जो बढ़ते पूंजी प्रवाह और सीमा-पार निवेश से जुड़े हुए हैं।
मदीनत जुमेराह में आयोजित दुबई फिनटेक समिट में बोलते हुए मू ने कहा कि ये दोनों वित्तीय केंद्र प्रतिस्पर्धी नहीं हैं, बल्कि एशिया, मध्य पूर्व और वैश्विक निवेशकों को जोड़ने वाले पूरक प्रवेश द्वार हैं। यह सत्र डीआईएफसी के गवर्नर ईसा काज़िम के उद्घाटन भाषण के बाद हुआ।
मू ने कहा, “एक-दूसरे का हिस्सा छीनने जैसी कोई बात नहीं है। दुनिया भर में इतनी संपत्ति है कि उसे अलग-अलग स्थानों पर प्रबंधित किया जा सकता है।” उन्होंने एशिया और यूरोप के बीच दुबई की भौगोलिक स्थिति, डीआईएफसी के आसपास के प्रौद्योगिकी और निवेश इकोसिस्टम, तथा जीसीसी देशों और भारतीय उपमहाद्वीप में विकास की संभावनाओं को प्रमुख ताकत बताया।
हांगकांग और सिंगापुर के साथ दुबई बैंक ऑफ सिंगापुर के तीन रणनीतिक केंद्रों में से एक है। मध्य पूर्व और यूरोप के ग्राहकों को सेवा देने वाली इसकी डीआईएफसी शाखा लगातार बैंकरों की संख्या बढ़ा रही है।
मू ने बताया कि बैंक ने दुबई में अवसरों को लेकर चीनी समूहों और निवेशकों की बढ़ती रुचि देखी है और चीन के निवेशकों तथा वरिष्ठ वित्तीय अधिकारियों के लिए शहर के दौरे आयोजित किए हैं, जबकि इसकी डीआईएफसी शाखा चीनी ग्राहकों के लिए समर्पित सेवा प्रदान करती है।
(स्रोत: Khaleej Times)
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